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किसान ID 11 करोड़ के क़रीब, ग्रामीण रोज़गार की हाज़िरी के लिए NMMS ऐप का नया सुरक्षित वर्ज़न लॉन्च

In brief
केंद्रीय कृषि एवं ग्रामीण विकास मंत्री शिवराज सिंह चौहान ने 23 अक्टूबर 2026 को नई दिल्ली में बताया कि देश में अब तक 10 करोड़ 99 लाख 70 हज़ार किसान ID (Farmer ID) बन चुकी हैं। दिसंबर 2027 तक 11 करोड़ का लक्ष्य रखा गया था, यानी देश इस पड़ाव से सिर्फ़ 30 हज़ार ID दूर है और वह भी समय से एक साल से ज़्यादा पहले। इसी मौक़े पर उन्होंने ग्रामीण रोज़गार योजना VB-G RAM G में मज़दूरों की हाज़िरी दर्ज करने वाले नेशनल मोबाइल मॉनिटरिंग सिस्टम (NMMS) ऐप का नया, ज़्यादा सुरक्षित वर्ज़न लॉन्च किया, जिसे IIT मद्रास की तकनीकी मदद से बनाया गया है।
नए ऐप में क्या बदला
सरकारी जानकारी के मुताबिक़ नया NMMS ऐप चेहरे की पहचान (फ़ेस ऑथेंटिकेशन) को और मज़बूत बनाता है। इसमें यह जाँचने की सुविधा है कि कैमरे के सामने असली, जीवित व्यक्ति है, कोई पुरानी फ़ोटो या डमी तस्वीर नहीं। ऐप में डिवाइस स्तर की सुरक्षा जाँच, सुरक्षित डेटा भेजने और ऐप से छेड़छाड़ या उसकी नकल रोकने के उपाय भी जोड़े गए हैं। मंत्री ने कहा कि फ़र्ज़ी हाज़िरी और दूसरों के नाम पर मज़दूरी लेने की शिकायतों के कारण यह क़दम ज़रूरी था। चेहरे से हाज़िरी मार्च 2026 से शुरू हुई थी, और अब तक लगभग 46 करोड़ मानव-दिवस के काम में से क़रीब 40 करोड़ फ़ेस ऑथेंटिकेशन से दर्ज हुए हैं।
असली मज़दूरों के लिए राहत
सबसे काम की बात यह है कि जहाँ मोबाइल नेटवर्क नहीं है, वहाँ भी हाज़िरी ऑफ़लाइन दर्ज की जा सकेगी और नेटवर्क मिलने पर अपलोड होगी। अगर किसी बुज़ुर्ग या दिव्यांग मज़दूर का चेहरा पहचानने में दिक़्क़त आए, या फ़ोन में तकनीकी ख़राबी हो, तो तय प्रक्रिया के तहत अपवाद (exception) का विकल्प भी रहेगा। मंत्री ने साफ़ कहा कि नेटवर्क या तकनीकी परेशानी की वजह से किसी असली मज़दूर का काम या मज़दूरी नहीं रुकनी चाहिए। भुगतान से पहले भी कई जाँच होती हैं: AI से दोहराई गई तस्वीरें पकड़ी जाती हैं, इंजीनियर काम को नापकर इलेक्ट्रॉनिक मेज़रमेंट बुक में दर्ज करते हैं, और पैसा सीधे मज़दूरों के बैंक खाते (DBT) में जाता है।
योजना के आँकड़े
सरकार के अनुसार 1 जुलाई 2026 से सभी ग्रामीण इलाक़ों में लागू VB-G RAM G के तहत 2.41 लाख से ज़्यादा ग्राम पंचायतों में 31.23 लाख कार्यस्थलों पर काम हुआ है और 2.89 करोड़ परिवारों के 3.65 करोड़ से ज़्यादा मज़दूरों को रोज़गार मिला है। वित्त वर्ष 2026-27 के लिए केंद्र ने इस योजना के लिए ₹95,692 करोड़ रखे हैं।
VSH की राय: तकनीक से धोखाधड़ी रुके, यह अच्छी बात है, लेकिन गाँवों में नेटवर्क और पुराने फ़ोन आज भी बड़ी चुनौती हैं। इसलिए ऑफ़लाइन हाज़िरी और बुज़ुर्गों के लिए अपवाद वाला विकल्प हमें इस अपडेट का सबसे ज़रूरी हिस्सा लगता है। आम लोगों की राय भी अक्सर यही होती है: नियम सख़्त हों, पर ईमानदार मज़दूर परेशान न हो। अपनी कमाई या बचत का हिसाब लगाना हो तो हमारा प्रतिशत कैलकुलेटर और FD कैलकुलेटर मुफ़्त है, और पढ़ाई के लिए हमारे परीक्षा गाइड और स्टडी पेज देखें।
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Why it matters
किसान ID से किसानों को सरकारी योजनाओं का लाभ आसानी से मिलता है, और नए NMMS ऐप से ग्रामीण मज़दूरों की हाज़िरी और मज़दूरी के नियम बदलते हैं।
People also ask
अब तक कितनी किसान ID बन चुकी हैं?
सरकार के अनुसार 23 अक्टूबर 2026 तक 10 करोड़ 99 लाख 70 हज़ार किसान ID बन चुकी हैं, जबकि लक्ष्य दिसंबर 2027 तक 11 करोड़ का है।
NMMS ऐप क्या है?
NMMS (नेशनल मोबाइल मॉनिटरिंग सिस्टम) ऐप से ग्रामीण रोज़गार योजना VB-G RAM G के कार्यस्थलों पर मज़दूरों की हाज़िरी चेहरे की पहचान से दर्ज की जाती है।
अगर नेटवर्क न हो तो हाज़िरी कैसे लगेगी?
नए वर्ज़न में हाज़िरी ऑफ़लाइन दर्ज होगी और नेटवर्क मिलने पर अपलोड होगी। चेहरा पहचानने में दिक़्क़त होने पर तय प्रक्रिया से अपवाद का विकल्प भी है।
Related free tools: Percentage Calculator, FD Calculator
Sources
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